बरेली शहर की चारों दिशाओं पर भगवान शिव के प्राचीनतम एवं प्रसिद्ध छह मन्दिरों — बाबा मढ़ीनाथ, बाबा अलखनाथ, बाबा त्रिवटीनाथ, बाबा वनखण्डीनाथ, बाबा धोपेश्वरनाथ और बाबा तपेश्वरनाथ — में बाबा त्रिवटीनाथ मन्दिर शैव मतानुयायियों की प्रमुख आराधना स्थली रही है।
जनश्रुतियों के अनुसार, सघन पांचाल प्रदेश में तीन वटवृक्षों के नीचे एक चरवाहे को स्वप्न में भगवान श्री त्रिवटीशंकर ने अपनी उपस्थिति का उद्घोष कराया। इस प्रकार विक्रम संवत 1474 से श्री त्रिवटीनाथ के रूप में इस मन्दिर ने विशेष प्रतिष्ठा अर्जित की। यह मन्दिर सभी भक्तों की मनोकामनाओं की पूर्ति का अनुपम केन्द्र है।
वर्ष 1979 से प्रारम्भ हुए स्वर्णिम काल में श्री त्रिलोक चन्द्र सेठ जी (पांचवें मंत्री) के कुशल निर्देशन एवं श्री प्रताप चन्द्र सेठ (वर्तमान मंत्री, 2004 से) की अथक सेवा से मंदिर का कायाकल्प हुआ है।
श्री त्रिलोक चन्द्र सेठ जी ने जयपुर से संगमरमर की आदमकद प्रतिमाएँ — श्री राम लक्ष्मण जानकी, लक्ष्मी नारायण, राधा कृष्ण और गणेश जी — लाकर रामालय में प्रतिष्ठित करवाईं। शिवालय में द्वादश ज्योतिर्लिंगों के प्रस्तर चित्र एवं माँ भगवती के दस विग्रह भी स्थापित किये।
रामालय के सन्निकट लगभग पाँच हज़ार श्रोताओं की क्षमता वाला सत्संग भवन बनवाया गया। श्री बाबू रामकुमार खण्डेलवाल जी की लगन से वर्ष 1981 में "श्री टीबरीनाथ सांगवेद संस्कृत विद्यालय" की स्थापना हुई।
मंत्री प्रताप चन्द्र सेठ ने तीन उपवन (नन्दन वन, किशोरी वन, गोपी वन), विशाल नंदी प्रतिमा (30 फुट लम्बी, 18 फुट ऊंची), 40 फुट ऊंची शिव प्रतिमा, नवग्रह मंदिर, यज्ञशाला, मनौती मंदिर एवं "जय भवानी" माँ दुर्गा भवन (2026) का निर्माण करवाया।
वर्ष 1918 में गठित न्यास से लेकर आज तक, 2026 तक कुल 13 अध्यक्ष और 6 मंत्री मंदिर सेवा समिति का नेतृत्व कर चुके हैं। वर्ष 2021 में 103 वर्षों में पहला संवैधानिक संशोधन करके "बाबा त्रिवटी नाथ मंदिर सेवा समिति" के नाम से पुनः पंजीकरण हुआ।
अध्यक्ष (2025 से)
मंदिर के 13वें अध्यक्ष के रूप में पदासीन। अपनी निस्वार्थ सेवा, कुशल दूरदर्शिता, और अटूट शिव भक्ति के माध्यम से मंदिर समिति का सफल नेतृत्व कर रहे हैं। बाबा त्रिवटीनाथ की कृपा से निरंतर विकास कार्यों को नई दिशा व ऊर्जा प्रदान की है।
वर्तमान मंत्री एवं सरवराकार (2004 से)
वर्ष 2000 में संयुक्त मंत्री एवं 2004 से मंत्री। पूर्ण समर्पण, लगन और कलात्मकता से मंदिर का कायाकल्प किया। "जय बाबा त्रिवटी नाथ दर्शनम्" पुस्तक का प्रकाशन 2026 में करवाया। नाथ नगरी कॉरिडोर योजना (₹11 करोड़) के अंतर्गत विकास कार्य जारी।
श्री कृष्ण कथा स्थल में पाँच विशाल द्वार बनवाये गये। रामालय के मुख्य द्वार पर दक्षिण की माता मीनाक्षी देवी मन्दिर के अनुरूप विशाल शिखर एवं राजस्थान के नक्काशी पत्थरों से सौन्दर्यीकरण किया गया।
श्री नंदी द्वार, मीराबाई द्वार, सूरदास द्वार, वल्लभाचार्य द्वार और चैतन्य महाप्रभु द्वार। उत्तर में सड़क से प्रवेश हेतु विशाल शिखर सहित नंदी द्वार उत्तरी बनवाया गया, जिसके नीचे से बड़े से बड़ा वाहन सरलता से निकलता है। पश्चिम में भी ऊंचे शिखर सहित नंदी द्वार पश्चिमी निर्मित है।
श्री कृष्ण कथा स्थल में नन्दन वन, किशोरी वन और गोपी वन नामक तीन बगीचे बनवाये गये। इन्हीं से सभी विग्रहों की नित्य ताजे फूलों से सेवा एवं भव्य श्रृंगार बारहों महीने होता है। दीवारों पर वर्टिकल बगीचों की अनुपम सुन्दरता सबको मंत्रमुग्ध करती है।
शिवालय के पश्चिम में 8 फुट ऊंचे मंच पर 30 फुट लम्बी, 18 फुट ऊंची विशाल नंदी जी की पीठ पर शिव परिवार की भव्य प्रतिमा विराजमान है — संभवतः उत्तर भारत की सबसे बड़ी नंदी प्रतिमा। मनौती मंदिर की छत पर 40 फुट ऊंची खड़ी शिव जी प्रतिमा 2022 में स्थापित की गई।
दैनिक प्रातः और संध्या काल की आरतियों के दौरान दिव्य ऊर्जा का अनुभव करें।
| ग्रीष्म काल | आरती | शरद काल |
|---|---|---|
| प्रातः काल | ||
| 06:00 बजे | मंगला आरती | 06:30 बजे |
| 07:00 बजे | श्रृंगार आरती | 07:30 बजे |
| 11:00 बजे | राजभोग आरती | 11:30 बजे |
| 11:30 बजे | मध्यान्ह आरती | 12:00 बजे |
| सांयकाल | ||
| 05:00 बजे | उत्थान आरती | 04:00 बजे |
| 07:00 बजे | संध्या आरती | 06:00 बजे |
| 08:00 बजे | राजभोग आरती | 07:00 बजे |
| 09:30 बजे | शयन आरती | 09:00 बजे |